Badalti soch (बदलती सोच)
परेशानियाँ ज़िन्दगी को रुख देती हैं, ऐसा मानना था हमारा कभी ,
आज मंजिल की ओर जाने का मन नहीं, राह में रुक जाना चाहते हैं |
आँख मूंद कर विदा कर देना चाहते हैं तकलीफों को, परेशानियों को ;
समेट लेना चाहते हैं इस बेफिक्र लम्हे को, बंद पलकों में |
फ़लसफ़ा हर वक़्त बदलता ही रहता है |
आज मंजिल की ओर जाने का मन नहीं, राह में रुक जाना चाहते हैं |
आँख मूंद कर विदा कर देना चाहते हैं तकलीफों को, परेशानियों को ;
समेट लेना चाहते हैं इस बेफिक्र लम्हे को, बंद पलकों में |
फ़लसफ़ा हर वक़्त बदलता ही रहता है |
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