सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो, अब गोविंद ना आयेंगे

Suno Draupadi, shashtra utha lo. Ab Govind na aayenge by Pushpmitra Upadhyay 

छोड़ो मेहँदी खड्ग संभालो

खुद ही अपना चीर बचा लो

द्यूत बिछाये बैठे शकुनि,

मस्तक सब बिक जायेंगे

सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो, 

अब गोविंद ना आयेंगे


कब तक आस लगाओगी तुम,

बिक़े हुए अखबारों से,

कैसी रक्षा मांग रही हो

दुशासन दरबारों से?


स्वयं जो लज्जाहीन पड़े हैं

वे क्या लाज बचायेंगे

सुनो द्रोपदी शस्त्र उठा लो

अब गोविंद ना आयेंगे


कल तक केवल अँधा राजा,

अब गूंगा बहरा भी है

होंठ सी दिए हैं जनता के,

कानों पर पहरा भी है


तुम ही कहो ये अश्रु तुम्हारे,

किसको क्या समझायेंगे?

सुनो द्रोपदी शस्त्र उठा लो,

अब गोविंद ना आयेंगे


-पुष्यमित्र उपाध्याय

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