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October 25, 2010

ख़्वाब से सुकून (Khwab Se Sukoon)

ख़्वाब ये मेरा है, जिस तरह चाहूं देखूं ;
मेरे इर्द-गिर्द ही सब होता है,
मैं ही इसकी कहानी, इसका सार हूँ |
इब्तिदा भी मैं, अंत भी मुझसे ही |
हकीक़त के छींटों से मुझको न जगाओ,
सपने में तो मुझको चैन से रहने दो |

2 comments:

Anonymous said...

This is a nice one.

Anuradha Sinha said...

Thanks, Mayank!

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